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Friday, September 27, 2019

69000 teachers' vacancy court update live 27 September 2019

बहुप्रतिष्ठत 69000 अध्यापक भर्ती परीक्षा के रोजाना  सुनवाई के क्रम में आज बीटीसी के तरफ से सीनियर अधिवक्ता कालिया सर का सबमिशन होना है।
आज मात्र 3 एडिशनल cases है।
69000 केस लंच बाद 2:15 pm पे सुना जायेगा। कोर्ट की लेटेस्ट अपडेट के लिए पेज से जुड़े रहे और शेयर कर दे ताकि सभी को लीगल अपडेट प्राप्त हो सके।
पेज को रिफ्रेश करते रहे--

  • अभी एडिशनल केस 3 चल रहा है, एडिशनल के 2 cases को लंच से पहले समाप्त करना चाहते है judges ताकि 69000 केस को पर्याप्त समय दे सके।
  • शेष 69000 केस स्टार्ट होने पर
  • सभी अधिवक्ता कोर्ट रूम में आ गए है
  • लंच समाप्त
  • अभी कोर्ट बैठी नही है
  • सुनवाई प्रारम्भ
  • कालिया सर डाइस पर
  • पासिंग मार्क गाइडलाइन्स के अनुरूप है परीक्षा का परिणाम तो सरकारी आदेश के हिसाब से जारी हो जाना चाहिए था :- कालिया सर
  • आनंद कुमार केस को समझते हुए
  • ATRE 2019 guidline को बता रहे
  • GO को डिफाइन करते हुए
  • सिंगल बेंच के आर्डर को डिफाइन करते हुए
  • Tet में मिनिमम शब्द का मतलब 60% है तो इस एग्जाम में 45% कैसे
  • 68500 भर्ती के GO में कटऑफ सिर्फ उसी भर्ती के लिए है
  • 60 65% सभी के लिए है
  • दोनों परीक्षाएं एक दूसरे से अलग
  • बीएड भर्ती में शामिल हुआ तो चैलेंज नही हुआ लेकिन कटऑफ पास किया तो इन्हें चैलेंज कर दिया गया
  • 1981 के नियमावली को समझते हुए
  • सिंगल बेंच ने ncte को गवर्निंग बॉडी बोला है
  • फिर भी कटऑफ पिछली भर्ती का ऐसा क्यों
  • शिक्षमित्र काम नंबर पा कर और भारांक के सहारे नौकरी करना चाहते है।
  • पिछली भर्ती में फेल sm भी इस भर्ती में है शामिल
  • सिंगल बेंच आर्डर पे डिसकसन
  • सिंगल बेंच का आर्डर केवल एक तरफ़ा है
  • सिंगल बेंच समानता का हनन करता हैं
  • 68500 भर्ती पे चर्चा
  • कालिया सर जो भी बता रहे जज साहब वो नोट कर रहे है
  • अभी रिजल्ट ही नही निकला तो कैसे पता 60 65 पे sm fail है
  • What was the rule... Rule was only pass the exam for sm or pass with high marks
  • वेटेज एग्जाम पास होने पे मिलेगा
  • और sm 60 65 पे नही 40 45 पे हो रहे इसका क्या मतलब पहले एग्जाम पास करो
  • जज साहब से ही प्रश्न आप ही बताएं पासिंग मार्क के बिना पास किस आधार पर कहेंगे और40 45 तो अवैध क्योंकि वह पिछलीभर्ती मात्र केलिए था
  • Uptet के लिए 55 60% और stet के लिए 60 65% सीधी बात बड़ी परीक्षा ज्यादा मार्क्स
  • अनुछेद 14 का हो रहा है उलंघन ये भर्ती सिर्फ sm की नही सबकी है। और समान हक़ देना चाहिये
  • टाइम तो टाइम का मतलब एग्जाम के बाद या एग्जाम से पहले कभी भी सरकार पासिंग मार्क्स लगा सकती है।
  • एक बार पुनः सिंगल बेंच के आर्डर की कमियों को बताते हुए
  • 7 जनबरी के जिओ पर आपकी क्या राय है :- इरशाद जी
  • यह सरकार के अनुभाग 4 से जारी किया
  • अनिल तिवारी सर:- प्रयागराज की कोर्ट ने सिंगल बेंच के आर्डर की धज्जियां उड़ा दी है, सिंगल बेंच का आर्डर अब चर्चा का विषय नही।
  • माथुर सर स्टार्ट
  • सेहत की वजह से कालिया सर का ब्रेक
  • माथुर सर आनंद कुमार के आर्डर को समझते हुए
  • क्वालिटी एजुकेशन की वजह से ही इनका समायोजन निरस्त हुआ था
  • 6 से 14 वर्ष के बच्चो के लिए क्वालिटी एजुकेशन की बात करते हुए
  • नियमाबली  रूल 2x(1) को समझाते हुए
  • बहस में कुछ भी नया नही
  • 68500 और 69000 की तुलना करते हुए
  • 68500 में 40 45 न क्वालीफाई करने वाले sm ही 69000 में 40 45 चाहते है
  • भारांक पर चर्चा
  • पासिंग मार्क्स नियोक्ता का अधिकार है वो चाहे जब तय करे
  • 22nd अमेंडमेंट को समझते हुए
  • अपॉइंटमेंट रूल को समझते हुए
  • क्या ये पासिंग मार्क्स 5 को लगाया जाता तो सही था और 7 को लगाया गया तो गलत है:- माथुर साहब
  • माथुर साहब भर्ती विज्ञापन को हिंदी में पढ़ कर समझा रहे
  • Next date 01/10/2019 at 2:15 pm

Tuesday, July 30, 2019

वृद्धि एवं विकास की परिभाषा तथा अंतर





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प्रस्तावना-
प्रत्येक व्यक्ति में शारीरिक मानसिक भावनात्मक और सामाजिक परिपेक्ष में पल-पल बदलाव आता है.
जन्म के समय बालक शिशु कहलाता है कुछ समय बाद बालक फिर किशोर वयस्क और एवं वृद्ध कहलाता है। प्रारंभिक अवस्था में वह अबोध कहलाता है, फिर शरारती गंभीर विद्वान ज्ञानी आदि विशेषताओं से युक्त हो जाता है। व्यक्ति की आयु में वृद्धि के साथ साथ उसके शारीरिक और मानसिक योग्यता क्षमताओं में भी वृद्धि होने लगती है इस कारण व्यक्ति के व्यक्तित्व एवं व्यवहार में भी परिवर्तन होता रहता है। शिक्षा के क्षेत्र में बालक के व्यक्तित्व एवं व्यवहार का अध्ययन किया जाता है। बालक के संपूर्ण व्यक्तित्व में परिवर्तन को अभिवृद्धि एवं विकास के नाम से जाना जाता है।

अभिवृद्धि-
अभिवृद्धि का सामान्य अर्थ होता है आगे बढ़ना बालक के वृद्धि के संबंध में इसे उसके शरीर के आंतरिक एवं बाह्य अंगों के आकार भार और इनकी कार्यक्षमता में होने वाली वृद्धि के रूप में देखा जाता है मानव शरीर में यह वृद्धि एक आयु तक (18- 20 ) वर्ष की ही होती है. उसके बाद अंगों में वृद्धि नहीं होती अर्थात इस आयु तक व्यक्ति पूर्ण वयस्क हो जाता है इस वृद्धि को देखा परखा जा सकता है। और इसका मापन भी किया जा सकता है।
मानव अभिवृद्धि से तात्पर्य उनके शरीर के बाह्य एवं आंतरिक अंगों के आकार भार एवं कार्य क्षमता में होने वाली वृद्धि से होता है जो उसके गर्भ समय को परिपक्वता प्राप्त करने तक चलती है।

विकास का अर्थ-
विकास एक स्वाभाविक प्रक्रिया है जो जन्म से लेकर के जीवन पर्यंत तक निरंतर चलती रहती है केवल शारीरिक वृद्धि की ओर ही संकेत नहीं करती अपितु इसके अंतर्गत हुए सभी शारीरिक मानसिक सामाजिक एवं संवेगात्मक परिवर्तन सम्मिलित रहते हैं जो गर्भ काल से लेकर के मृत्यु उपरांत तक निरंतर प्राणी में प्रकट होते रहते हैं।विकास में होने वाले सभी परिवर्तन सामान नहीं होते जीवन की प्रारंभिक अवस्था में होने वाले परिवर्तन रचनात्मक और परिवर्तन विनाशात्मक होते हैं रचनात्मक परिवर्तन प्राणी में परिपक्वता लाते हैं और विनाश आत्मक परिवर्तनों से वृद्धावस्था की ओर ले जाते हैं। विकाश एक व्यापक शब्द है। इसे परिवर्तनों की श्रंखला भी कहा जाता है इसके फलस्वरूप व्यक्ति में नवीन विशेषताओं का उदय होता है तथा पुरानी समस्याओ की समाप्ति हो जाती है। प्रौढ़ावस्था में पहुच कर मनुष्य स्वयं को जिन गुणों से संपन्न पाता है विकास की प्रक्रिया के ही परिणाम होते हैं।

विकास की परिभाषा-
हरलॉक के अनुसार-
"विकास केवल अभिवृद्धि तक ही सीमित नहीं है वरन् वह व्यवस्थित तथा संगत परिवर्तन है जिसमें की प्रौढ़ावस्था के लक्ष्य की ओर परिवर्तनों का प्रगतिशील क्रम नहीं रहता है जिसके परिणाम स्वरूप व्यक्ति में नवीन विशेषताएं एवं योग्यताएं प्रकट होती हैं."

मुनरो के अनुसार -
“विकास परिवर्तन श्रंखला की वह अवस्था है जिसमें बच्चा प्रौढ़ावस्था से लेकर के पूर्ण अवस्था तक गुजरता है विकास कहलाता है.”

वृद्धि एवं विकास में अंतर -
मुख्यतः वृद्धि एवं विकास का प्रयोग लोग पर्यावाची शब्द में करते हैैं लेकिन इन दोनों में काफी अंतर है जिसे हम निम्नलिखित रूप से देख सकते हैैं -

1.अर्थ के अधार पर-
वृद्धि का अर्थ है शारीरिक परिवर्तन। इन परिवर्तनो के कारण व्यवाहार मे परिवर्तन होने लगता है। लेकिन विकास का अर्थ गुणात्मक परिवर्तनो से किया जाता हैं। जैसे- बालक की कार्यकुशलता का विकास, उसकी कार्यक्षमता में विकास और व्यवहार में सुधार आदि।

2.व्यापक व संकुचित शब्द-
वृद्धि को विकास से संकुचित माना जाता है। क्योंकि वृद्धि की अवधारणा विकास की अवधारणा का ही एक भाग है।

3.परिमाणात्मक और गुणात्मक-
 वृद्धि का तात्पर्य मात्रात्मक या परिमाणात्मक परिवर्तनो से जबकि विकास का सम्बध गुणात्मक परिवर्तनों से होता है। जैसे- बालक में वृद्धि हो रही है इसका अर्थ यह नहीं हो सकता कि उसमे विकास भी हो रहा है। जबकि बालक में विकास के लिए वृद्धि आवश्यक नहीं है।

4.वृद्धि और विकास की निरन्तरता-
वृद्धि लगातार नहीं चलती बल्कि शिशुकाल में तीव्र गति से और उसके बाद धीमी हो जाती है। लेकिन विकास की प्रक्रिया लगातार चलती रहती है। वह रूकती नहीं है।
   

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